मेरे पिछले और इस आलेख के बीच में फिर से तीन जगह धमाके हो चुके हैं। कई और लोगों की जानें गईं। गृह मन्त्री कभी अपनी तो कभी पुलिस की बगलें झाँकते नज़र आए। हमें भी लोगों को भी पता है कि इन घटनाओं में हूजी, सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे किसी इस्लामवादी संगठन का नाम सामने आएगा। कुछ शोर होगा फिर अगले धमाके तक शान्ति हो जाएगी। तूफ़ान से पहले की शान्ति। श्मशान की शान्ति। नपुंसकों की शान्ति। गाँधी की शान्ति।

मूर्ख कहीं के!! इतना सब होने के बाद भी रटेंगे ईश्वर अल्लाह तेरो नाम। सौहार्द्र के नारे लगाएँगे। प्रेम और अहिंसा के सैकड़ों साल पुराने राग का गर्धव अलाप करेंगे। लेकिन बात यदि होगी क्रान्ति के आह्वान की तो अपने में दड़बों में छिप जाएँगे।
पर अब समय आ गया है कि हमें निर्णय कर लेना चाहिए कि हमें एक सच्चे भारतीय की तरह सम्मान से जीना है या फिर इसलाम के जूते के नीचे ख़ुद को कुचलवाना है। कुछ देर हम और रुके, और थमे या सोचने लगे कि सब ठीक हो गया है तो ये अल्लाह के नेक बन्दे हमें ठिकाने लगाने के लिए फिर से तैयार हो जाएँगे। पर क्या करें अपनी क़ौम के ग़द्दारों से भी पार पाना ज़रूरी है। एकता मंच पर आतंकवादियों(मुसलमानों) के साथ शान्ति की बातें बनाने वालों को भी ठिकाने लगाना आवश्यक है।
इसलिए हे समान विचारधारा वालों मिल जाओ। हम जानते हैं कि हम कम है। हमारा धर्म अभी एकजुट नहीं, हमारे हाथों में हथियार नहीं, हमारे पास वो संख्या भी नहीं। पर हमारे पास इच्छाशक्ति है जो कि हम जैसे सोलह भी सोलह करोड़ पर भारी पड़ेंगे। रक्त की पवित्रता का परिचय दो। देशभक्ति का यज्ञ है सर्वस्व होम करने का दम रखो। वीरगति को प्राप्त हुए तो मोक्ष मिलेगा, विजय हुई तो सांसारिक सुख। निर्णय तुम्हें करना है।
पर अब समय आ गया है कि हमें निर्णय कर लेना चाहिए कि हमें एक सच्चे भारतीय की तरह सम्मान से जीना है या फिर इसलाम के जूते के नीचे ख़ुद को कुचलवाना है। कुछ देर हम और रुके, और थमे या सोचने लगे कि सब ठीक हो गया है तो ये अल्लाह के नेक बन्दे हमें ठिकाने लगाने के लिए फिर से तैयार हो जाएँगे। पर क्या करें अपनी क़ौम के ग़द्दारों से भी पार पाना ज़रूरी है। एकता मंच पर आतंकवादियों(मुसलमानों) के साथ शान्ति की बातें बनाने वालों को भी ठिकाने लगाना आवश्यक है।
इसलिए हे समान विचारधारा वालों मिल जाओ। हम जानते हैं कि हम कम है। हमारा धर्म अभी एकजुट नहीं, हमारे हाथों में हथियार नहीं, हमारे पास वो संख्या भी नहीं। पर हमारे पास इच्छाशक्ति है जो कि हम जैसे सोलह भी सोलह करोड़ पर भारी पड़ेंगे। रक्त की पवित्रता का परिचय दो। देशभक्ति का यज्ञ है सर्वस्व होम करने का दम रखो। वीरगति को प्राप्त हुए तो मोक्ष मिलेगा, विजय हुई तो सांसारिक सुख। निर्णय तुम्हें करना है।

