शुक्रवार, 3 अक्तूबर 2008

मातृभूमि की पुकार

मेरे पिछले और इस आलेख के बीच में फिर से तीन जगह धमाके हो चुके हैं। कई और लोगों की जानें गईं। गृह मन्त्री कभी अपनी तो कभी पुलिस की बगलें झाँकते नज़र आए। हमें भी लोगों को भी पता है कि इन घटनाओं में हूजी, सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे किसी इस्लामवादी संगठन का नाम सामने आएगा। कुछ शोर होगा फिर अगले धमाके तक शान्ति हो जाएगी। तूफ़ान से पहले की शान्ति। श्मशान की शान्ति। नपुंसकों की शान्ति। गाँधी की शान्ति।
मूर्ख कहीं के!! इतना सब होने के बाद भी रटेंगे ईश्वर अल्लाह तेरो नाम। सौहार्द्र के नारे लगाएँगे। प्रेम और अहिंसा के सैकड़ों साल पुराने राग का गर्धव अलाप करेंगे। लेकिन बात यदि होगी क्रान्ति के आह्वान की तो अपने में दड़बों में छिप जाएँगे।

पर अब समय आ गया है कि हमें निर्णय कर लेना चाहिए कि हमें एक सच्चे भारतीय की तरह सम्मान से जीना है या फिर इसलाम के जूते के नीचे ख़ुद को कुचलवाना है। कुछ देर हम और रुके, और थमे या सोचने लगे कि सब ठीक हो गया है तो ये अल्लाह के नेक बन्दे हमें ठिकाने लगाने के लिए फिर से तैयार हो जाएँगे। पर क्या करें अपनी क़ौम के ग़द्दारों से भी पार पाना ज़रूरी है। एकता मंच पर आतंकवादियों(मुसलमानों) के साथ शान्ति की बातें बनाने वालों को भी ठिकाने लगाना आवश्यक है।

इसलिए हे समान विचारधारा वालों मिल जाओ। हम जानते हैं कि हम कम है। हमारा धर्म अभी एकजुट नहीं, हमारे हाथों में हथियार नहीं, हमारे पास वो संख्या भी नहीं। पर हमारे पास इच्छाशक्ति है जो कि हम जैसे सोलह भी सोलह करोड़ पर भारी पड़ेंगे। रक्त की पवित्रता का परिचय दो। देशभक्ति का यज्ञ है सर्वस्व होम करने का दम रखो। वीरगति को प्राप्त हुए तो मोक्ष मिलेगा, विजय हुई तो सांसारिक सुख। निर्णय तुम्हें करना है।

1 टिप्पणी:

Amit Mathur ने कहा…

शाबाश दोस्त, हिन्दुओ को लालच भी दिया तो वीरगति और सांसारिक सुख का. गीता में भगवन ने ख़ुद कहा है की सृजन और विनाश भगवान् के हाथ में है. हमे सिर्फ़ कर्म करना और यहाँ कर्म करने का अर्थ है वो कर्म जो हमें मोक्ष की और ले जाए. सांसारिक सुख को तो हम सनातनी अपने जूते की नोक पर रखते हैं. हमारे धर्म में इतनी शक्ति है की हम अपने ही धर्म से एक भरा पूरा सिख धर्म खड़ा कर सकते हैं. मगर इन सबका क्रेडिट हम नहीं लेते ये सब तो स्वयं मुरलीधर भगवान् कृष्ण के हाथ में है. आपने इतना रक्त देखा है की आपकी आँखों का रंग लाल हो गया है. हर तरफ़ आपको विध्वंसक रक्तबीज नज़र आ रहे हैं. हिन्दुओ को अपने ब्लॉग में मुसलमानों से ज़्यादा बार गाली दे चुके हैं. उन्माद से विषाद का सृजन होता है हमने तो शास्त्रों में यही पढ़ा है. आपने अगर कोई और वाम मार्गी शास्त्र पढ़े हों तो ये आपकी दुर्बुद्धि है. वैसे मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूँ आपके इस विष भरे ब्लॉग से कोई हिंदू क्रांति पैदा नहीं हो रही है. इसका सबूत है की आपके ब्लॉग पर अधिक टिप्पणिया नहीं हैं. अब अगर इसे आप हम हिन्दुओ की कायरता कहें तो हमारा इश्वर गवाह है की हम पूरी तरह से उसी को समर्पित हैं. आगे उसकी मर्ज़ी. जय हिंद.